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| प्रकाशन दिनांक | लेखनविभाग | शीर्षक | लेखक | प्रतिसाद | वाचने |
अंतिम अद्यतन |
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| 28/09/18 | गीतरचना | उभं पीक पाण्यासाठी.. | Chitra Kahate | 4 | 5,361 | 6 वर्षे 3 months |
| 19/01/19 | अनुभवकथन | उठ शेतकऱ्या, घे मशाल | Komal Bhujbal | 7 | 7,254 | 6 वर्षे 11 months |
| 19/09/18 | गझल | मेला कृषक उपाशी | Dr. Ravipal Bha... | 6 | 8,148 | 7 वर्षे १ आठवडा |
| 26/09/18 | कथा | आणि तिनं खुरप्याच्या पाठीला धार लावली... | Raosaheb Jadhav | 2 | 5,179 | 7 वर्षे 2 आठवडे |
| 09/09/18 | काव्यसंग्रह समीक्षण | *अस्वस्थ काळ अधोरेखित करणारा - माणसाच्या सोयीचा देव* | Kiran dongardive | 1 | 4,119 | 7 वर्षे 2 आठवडे |
| 09/10/18 | चळवळीतील अनुभव | शेतमालाच्या भावाची लढाई | तेजराव मुंढे | 1 | 4,001 | 7 वर्षे 2 आठवडे |
| 19/09/18 | पद्यकविता | धोरण | RANGNATH TALWATKAR | 3 | 5,805 | 7 वर्षे 2 आठवडे |
| 24/09/18 | गझल | हालहाल पोचलेत कुंचल्यातही तुझे | Dhirajkumar Taksande | 5 | 6,994 | 7 वर्षे 2 आठवडे |
| 12/09/18 | गझल | गर्भार कास्तकारी | Ramesh Burbure | 11 | 10,328 | 7 वर्षे 2 आठवडे |
| 21/09/18 | गीतरचना | कवडीमोल दाम | मुक्तविहारी | 6 | 7,785 | 7 वर्षे 3 आठवडे |
| 23/09/18 | छंदोबद्ध कविता | दारिद्र्य | मुक्तविहारी | 2 | 4,191 | 7 वर्षे 3 आठवडे |
| 27/09/18 | छंदोबद्ध कविता | लढू गड्यांनो | लक्ष्मण खेडकर | 5 | 6,734 | 7 वर्षे 3 आठवडे |
| 08/10/18 | छंदोबद्ध कविता | रोज नवेच मरण | Sidheshwar Ingole | 4 | 6,504 | 7 वर्षे 3 आठवडे |
| 18/09/18 | गीतरचना | आडून धोरणांच्या! | प्रदीप थूल | 3 | 4,734 | 7 वर्षे 3 आठवडे |
| 12/09/18 | गीतरचना | स्वाभिमान तू माझा | RANGNATH TALWATKAR | 2 | 5,483 | 7 वर्षे 3 आठवडे |
| 24/09/18 | गीतरचना | कवा हासू कवा रडू | आशिष आ. वरघणे | 2 | 4,796 | 7 वर्षे 3 आठवडे |
| 29/09/18 | गीतरचना | तू रे पोशिंदा जगाचा | ravindradalvi | 3 | 6,233 | 7 वर्षे 3 आठवडे |
| 09/10/18 | गीतरचना | धोरण | RANGNATH TALWATKAR | 1 | 3,810 | 7 वर्षे 3 आठवडे |
| 10/10/18 | गीतरचना | सरकारी धोरण, रचे बापाचे सरण | बालाजी कांबळे | 3 | 6,175 | 7 वर्षे 3 आठवडे |
| 01/10/18 | अनुभवकथन | पिकलेला काटा अन् करपलेली पिके | Bhaskar Bhujang... | 1 | 14,141 | 7 वर्षे 3 आठवडे |
| 13/09/18 | शेतीतील अनुभव | शेतकऱ्यांप्रती सरकारची अनास्था | नितीन साळुंके | 2 | 4,656 | 7 वर्षे 3 आठवडे |
| 16/09/18 | गझल | ते प्रेत बोलताहे | Dhirajkumar Taksande | 2 | 4,276 | 7 वर्षे 3 आठवडे |
| 24/09/18 | गझल | "खोटेच पंचनामे" | Ramesh Burbure | 5 | 7,104 | 7 वर्षे 3 आठवडे |
| 21/09/18 | गझल | चोरीस सूट आता | प्रदीप थूल | 5 | 6,417 | 7 वर्षे 3 आठवडे |
| 06/10/18 | गझल | गझल: सर्वहारा | Dhirajkumar Taksande | 1 | 4,262 | 7 वर्षे 3 आठवडे |