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| प्रकाशन दिनांक | प्रकार | शिर्षक | लेखक | वाचने | प्रतिसाद |
अंतिम अद्यतन |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 12/09/2017 | लेखनस्पर्धा-२०१७ | वारसा | Dhirajkumar Taksande | 6,163 | 2 | 28/09/17 |
| 12/09/2017 | लेखनस्पर्धा-२०१७ | घाल घाव! | Dhirajkumar Taksande | 6,854 | 2 | 28/09/17 |
| 11/09/2017 | लेखनस्पर्धा-२०१७ | कर्जमृत्यु | Dhirajkumar Taksande | 6,220 | 3 | 28/09/17 |
| 24/09/2017 | लेखनस्पर्धा-२०१७ | तुझ्यापायीच झाली ही दैना | Dhirajkumar Taksande | 6,074 | 2 | 28/09/17 |
| 11/09/2017 | लेखनस्पर्धा-२०१७ | थांबा! | Raosaheb Jadhav | 7,223 | 4 | 27/09/17 |
| 15/09/2017 | लेखनस्पर्धा-२०१७ | जगावं की मरावं | मुक्तविहारी | 6,880 | 3 | 26/09/17 |
| 16/09/2017 | लेखनस्पर्धा-२०१७ | kawita | Rajesh Jaunjal | 7,574 | 4 | 26/09/17 |
| 16/09/2017 | लेखनस्पर्धा-२०१७ | बंद रस्ते | Rajesh Jaunjal | 7,896 | 4 | 26/09/17 |
| 20/09/2017 | लेखनस्पर्धा-२०१७ | दूर दूर जावे | Rajesh Jaunjal | 7,076 | 4 | 26/09/17 |
| 15/09/2017 | लेखनस्पर्धा-२०१७ | भारत कशाला म्हणतात! | Dr. Ravipal Bha... | 10,596 | 9 | 26/09/17 |
विश्वस्तरीय लेखनस्पर्धा : २०१४ ते २०२४
| प्रकाशन दिनांक | शिर्षक | लेखक | वाचने |
|---|---|---|---|
| 18-09-2018 | प्राण वेचताना | Dhirajkumar Taksande | 11,275 |
| 16-09-2018 | गझल | Dhirajkumar Taksande | 19,587 |
| 09-09-2018 | भारत महासत्ता कधी होईल यार | Kiran dongardive | 6,390 |
| 09-09-2018 | पोट भरल्यावर लढाई संपते यार | Kiran dongardive | 5,030 |
| 20-09-2018 | छंदमुक्त कविता- धावपट्टी | Rajesh Jaunjal | 6,384 |
नवीन प्रतिसाद